Prototyping model ( Evolution model) (in hindi)

आज हम software engineering का एक बहुत महत्वपूर्ण prototyping model in hindi   को अच्छे से पढेंगे और इसके एक – एक पॉइंट को detailed से जानगे जैसे की working of  prototyping  model , advantage of prototyping  model , disadvantage of prototyping  model, working prototyping  model  in hindi और prototyping  model risk kya – kay hote hain . इसे software development में कैसे  use  करते  हैं  . तो चलिये शुरू करते. hello दोस्तों Hindi me iT में

Prototyping  model 

इस model में user से   requirement लेने के बाद small sample बनाया जाता हैं . और वह sample user को दिखाया जाता हैं .अगर costumer (user) उसे सही बताता हैं . उसके बाद आगे की process होती हैं . इसमें user से feedback लिया जाता हैं . जबकि waterfall model ऐसा नहीं होता हैं . इसलिए waterfall model risk software development model हैं.

prototype model

working 

prototyping model hard planning पर नहीं बनाया जाता हैं . ये एक early approximation  हैं . इसमें   product का और software system का model बनाया जाता हैं .जो costumer को दिखाया जाता हैं .

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types phase of prototyping model 

Requirement gathering and Analysis

इस model में सबसे पहले requirement gathering and analysis होती हैं . इसमें software engineer तथा user साथ में बैठकर requirement को analysis करते हैं .

Quick  Design

इस model में quick design तैयार किया जाता हैं . ये एक detailed नहीं होती . इसमें कुछ जरुरी point होते हैं . जिससे user को पता चल सके की design सही हैं की नहीं.

Build prototype

जो जानकारी quick design से li गई हैं . उससे एक prototype तैयार किया जाता हैं .

Costumer  Evolutionary 

costumer Evolution में जो system discover हुआ हैं . उसकी training देनी होगी की इसको कैसे use करना हैं . इसको use कैसे करना हैं . उसके बाद हम costumer से evolution लेंगे . यह जानने की कोशिश करेंगे जो software बनाया गया हैं उसमे कोई change की requirement की जरूरत तो नहीं हैं .

Review and update

अगर user ने बताया इसमें कोई changes की requirement हो तो इस phase में modify किया जायेगा .

जैसे ही costumer satisfy हो जायेगा . उसके बाद आगे के phase apply हिंगे . जैसे coding , testing , maintenance .

  • इस phase में सारे future add नहीं की  जा रहे हैं . लेकिन user को एक basic idea provide क्र रहे हैं की आपका जो software होगा वह किस type का होगा .
  • ये model हम जब use करते हैं जब accurate requirement and solution पता नही होती हैं. यानी पहले से ही user user को पता नहीं होती की उसको  किस प्रकार का software चाहिये.
  • इसमें जो requirement समझ में आ जाती हैं . उसका prototype में include तैयार कर दिया जाता हैं . बाकी requirement को समझने के बाद add कर दिया जाता हैं . यानी की जितनी requirement समझमें आती हैं उसका एक prototype बनाकर costumer को दिखा दिया जाता हैं.
  • जब की waterfall model में पहले सारी requirement  पता होती हैं. तभी software development होगा जवकि ऐसा possibleही नहीं की costumer सारी requirement एक साथ बता दें उस case में prototype model use किया जाता हैं .
  • इसमें multiple iteration और requirement analysis and design raptly होती हैं .
  • जब user satisfy हो जायेगा तब prototype के code को final software को बनाने में use किया जाता हैं .
  • ये model strict planning पर based नहीं होता हैं .

Advantage of prototyping model 

  1. costumer की requirement को identify करना easy होता हैं .
  2. waterfall model में costumer का feedback last में लिया जाता हैं . लेकिन यहाँ पर जो prototype है वह starting में ही design होने के बाद costumer को दिखा दिया जाता हैं .
  3. यहाँ पर costumer को समझ में आ जाता हैं शुरू में ही की software कैसे  बनेगा .
  4. इसमें user involved होता हैं.software development process में जबकि waterfall model में costumer में user तब तक नहीं मिलता जब तक software तैयार नहीं हो जाता हैं .
  5. यहाँ पर error  को फंड करके solve कर लिया जाता हैं . जबकि waterfall model में ऐसा नहीं होता हैं .
  6. यहाँ quick feedback मिलता हैं costumer से जिसकी वजह से better solution find कर पते हैं .
  7. prototype में कुछ भी miss हो गया तो उसे आसानी से find कर सकते हैं   . क्योंकि costumer से feedback मिलता रहता है.
  8. इस project को बनाने में time कम लेगाग . क्योंकि एक बार हमने  costumer से requirement analysis कर li उसके बाद project को develop करने में कम time लालेगा.

Disadvantage of prototyping model 

  1. इसमें insufficient analysis हो सकती हैं . क्योंकि जो software engineer है वह prototype बनाने के  बाद requirement को analysis नहीं  करेगा.
  2. यहाँ हो सकता हैं जो documentation हैं वह complete नहीं बनाये जाये .
  3. यहाँ implement पूरी नहीं होती हैं.

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आशा  करता हूँ prototyping model in hindi   को अच्छे से पढेंगे और इसके एक – एक पॉइंट को detailed से जानगे जैसे की working of  prototyping  model , advantage of prototyping  model , disadvantage of prototyping  model, working prototyping  model  in hindi और prototyping  model risk kya – kay hote hain . इसे software development में कैसे  use  करते  हैं . आपको   समझ में गया होगा . अगर आपको इससे related कोई question पूछना है तो आप comment करके पूछ सकते है . हम आपकी comment का जबाब जरुर देंगे . अगर हमारे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगी हो तो हमे comment करके जरुर बताये और आपका हमको कोई सुझाब हो तो उसे भी जरुर बताये . दोस्तों आपसे एक request है . आप इस जानकारी को आपने दोस्तों

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