software testing tutorial in hindi | software testing ko hindi में सीखें

हेल्लो दोस्तों आपका Hindi me iT अभिनन्दन है . आज हम इस आर्टिकल में software testing के महत्वपूर्ण  software testing tutorial in hindi | software testing ko hindi में सीखें  में पढने जा रहे है. जो की सॉफ्टवेर टेस्टिंग  को अच्छे से समझने के लिये इसे जानना बहुत सरूरी है . तो चलिये शुरू करते है .

Overview of software evolution in hindi

Evolution एक एसा प्रोसेस है . जिसमे software को स्टेप by स्टेप develop किया जाता है . जिसके अन्दर हम अलग – अगल लोगो से requirement लेते है .उसके बाद सॉफ्टवेर engineering के सभी रूल को अप्लाई  करते हुये   requirement के अनुसार ही सॉफ्टवेर को  develop करते है .

software evolution को  दुसरे शब्दों में कहे तो software maintenance बोलते है . इस process में किसी भी सॉफ्टवेर का मॉडिफिकेशन होता हैं . जब भी किसी सॉफ्टवेर को मॉडिफाई किया जाता है.  तो उसमे ये देखा जाता है की customer की kya डिमांड है . तथा मार्किट में क्या change हो रहे है . इन सब बातो का ध्यान रखना जरुरी होता है .किसी  भी सॉफ्टवेर को बनाने में काफी टाइम तथा cost आता है . इसी बिच हम किसी भी सॉफ्टवेर में जरूरत के अनुसार Specification बढ़ा सकते है. या फिर जरूरत के अनुसार remove भी कर  सकते है . यही सॉफ्टवेर का evolution होता है .

software evolution में तीन step होते है .

  1. जब हम किसी भी सॉफ्टवेर को develop करते तो जब तक उसे maintenance तथा update करते रहते है. जब तक user की requirement के अनुसार सॉफ्टवेर develop नही हो जाता .
  2. सॉफ्टवेर evolution में सबसे पहले अलग – अलग जाकर लोगों की requirement लेते है .  उसके बाद सभी requirement को analysis करते है . उसके बाद जो भी रिजल्ट निकलता है तो सॉफ्टवेर को develop करने की Planning करते है .requirement के अनुसार ही सॉफ्टवेर develop किया  जाता है .
  3. जब हम सॉफ्टवेर develop करते है . तो एक model तैयार kiya जाता है . उसके बाद अगर user को सॉफ्टवेर में कोई और change की जरूरत होती है तो उसे user  बताता है. click

सबसे पहले SDLC का पूरा नाम जान लेते है .इसका पूरा नाम software development life cycle है . किसी भी सॉफ्टवेर को develop करने में जो स्टेप फ्लो यानि की प्रक्रिया पूरी की जाती है . use ही software development life cycle कहते है .तो आज हम इसके बारे में details से जानेंगे .

7 software testing principles

Software development life cycle in hindi

किसी भी सॉफ्टवेर प्रोजेक्ट को बनाने में जो भी प्रक्रिया (step and process) होती है . उन सभी को मिलाकर SDLC बनता है . ये step इस प्रकार है .

किसी भी सॉफ्टवेर को develop करने में जो स्टेप प्रयोग किये जाते है . उनको five भागो में विभाजित किया गया है .

  1. Planning
  2. Analysis
  3. Design
  4. Implementation
  5. Maintenance 

इस सभी को मिलाकर ही SDLC का बनता है . तो चलिए इन पांचो स्टेप को details से समझते है .

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Planning:-

किसी भी सॉफ्टवेर को बनाने से पहले प्लानिंग करना बहुत जरुरी होता है. Planning के अंदर हम ये देखते है software के क्या goals है ,सॉफ्टवेर को क्या अचीवमेंट करना है, सॉफ्टवेर की क्या requirement है , इसे develop करने में कितना खर्चा आएगा , इसमें इतना risk हो सकता है .आदि ये सब बनाने से पहले सोचना होगा .अब हम ये बोल सकते है किसी सॉफ्टवेर को बनाने से पहले प्लानिंग करना कितना जरुरी है .

Analysis:-

अगर बात करे Analysis Phase की तो इसमें problems को बारीकी  से समझा जाता है . और Analysis करके  ये देखा जाता है  की user को क्या चाहिए .  user की क्या requirement  उसी के अनुसार software develop करते है . इसी Phase में हार्डवेयर को भी   Analysis kiya जाता है .

Design:-

किसी भी सॉफ्टवेर को develop करने में डिजाईन phase की अहम भूमिका होती है . इसमें ये देखना होता है . की user को किस प्रकार की डिजाईन पसंद है . इसमें सिस्टम के हार्डवेयर का भी ध्यान रखना होता . क्यूकि ये देखना होता है की इस सॉफ्टवेर को किस ऑपरेटिंग सिस्टम पर run करना है .

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Implementation:-

इस phase में किसी भी सॉफ्टवेर को develop करने के लिए कोडिंग , टेस्टिंग करना होता है . इस phase के अंदर सबसे पहले database design  को implement किया जाता है .

Maintenance :-

maintenance मे software develop हो जाता है . इसके बाद software को use करने में user को जो problem होती है . उन problem का solution किया जाता है  .maintenance software development का अंतिम phase है . maintenance को आसान शब्द में समझे तो maintenance का मतलब किसी user के अनुसार problem का solution ही maintenance  कहलाता है .click

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What is software testing in Hindi

सॉफ्टवेर टेस्टिंग  में हम actual result को  accepted result के साथ match करना होता है . कोई भी सॉफ्टवेर bug फ्री होना चाहिए .

software testing एक एसी technic जिसमे किसी software product की जाँच की जाती है .की software  जिस requirement के लिए तैयार किया गया है उनको सही से कर रहा है की नही . software testing में software की correctness, completeness, quality, security आदि जांचा जाता है .

  • Correctness  जो  application आपने develop कर रहे है . user की requirement के आनुसार वह सही से work करना चाचिए .
  • Completeness जो भी user की requirement है वह उस software me सारी होनी चाहिए .
  • Quality user के requirement के अनुसार software की quality अच्छी होनी चाहिए .

security किसी भी software की security अच्छी होनी चाहिए .

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Why software testing is need

सॉफ्टवेर टेस्टिंग  इस लिए जरुरी है . ताकि जब भी  software को development phase चल रहा होता है . defect और error फिक्क कर सकते है .  ये  बहुत ही essential है की costumer की reliability और costumer को हम जो भी application दे रहे है. उससे   costumer satisfy  होना चाहिए तथा software की quality high होनी चाहिए .

testing इसलिए भी जरुरी है . जब हम किसी costumer को software deliver कर रहे होते है . उसकी quality high  होनी चाहिए अगर software की quality high होगी तो maintenance cost कम आएगी और product का  रिजल्ट अच्छा रहेगा . किसी भी सॉफ्टवेर में ये तीन चीज होनी चाहिए

  1. accurate
  2. consistent
  3. Reliable
  4. software की  preformation अच्छा होना चाहिये .click

Types of software testing in hindi

  1. Manual testing
  2. Automation testing

इनके बारे में detailed से जानने के लिये click करे

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7 software testing  principle in hindi

  1. show presence of error
  2. Exhaustive
  3.  Early testing
  4. Defect clustering
  5. Pesticide   paradox
  6. testing is context dependent
  7. absence of error fallacy

अब इस सबको detail में समझते हैं.की हर एक principle का क्या importance हैं और हर एक principle हमको क्या approach देता हैं .

  1. show presence of error

हम कोई application को test कर रहे हैं तो ये principle हमको बताता हैं . की इसलिए  हम text cases जो design किया हैं वो बहुत ही जरुरी हैं . हमको text cases काफी ध्यान में रख कर design करने होते हैं . जिसकी help से हमको ज्यादा से ज्यादा defect मिल सके .

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2 . Exhaustive

ये principle हमको बताता हैं . की Exhaustive testing is impossible . चलिये इसको एक example से समझते हैं.

Restaurant की billing का=: Restaurant में एक particular vat रखा हुआ हैं.जो हम हर बार नही देखते की 1000 पर कितना vat हैं , १२००० पर कितना vat हैं अगर हम ऐसा ही करते रहेंगे तो testing कभी ख़तम ही नही होगी .

तो ये principle बताता हैं.की किसी reason के लिये हमको जो risk वो check करना हैं .उसका क्या output आ रहा हैं .

3. Early testing

यानी की हमको testing बहुत जल्दी शुरू कर देनीचाहिए . जब किसी application की  requirement आ रही हैं . तभी से testing शुरू क्र देनी चाहिये जैसे की उसके document देख सकते हैं . उसकी design देख सकते हैं .ये software development के first phase में भी हो सकता हैं .

4 . Defect clustering

जयादातर report किये हुये defect एक small number होते हैं . इसका मतलब एक छोटा सा भी modules इसके अंदर भी बहुत से defect हो सकते हैं .

Example :-

login module में इतने combination होते हैं . और कहीं ना कंही कुछ combination छुट जाये तो बहुत सारे defect आ सकते हैं .

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5 .Pesticide paradox

इसका मलतब जो हमने पहली बार application को develop करने में जो text cases  module बनाये थे . उन same text cases module को उस application के दुसरे version में use नही कर सकते . ऐसा करने पर हम उसमे bug नही निकल पाएंगे .

example :-

जैसे whatsapp के  first version में हमने text cases module बनाये थे . और आज version four हैं हम उन text cases use नही कर सकते कक्योंकि जब first version आया था तब android 8 था और अब android 9 हैं . इसके हिसाब से same text cases अप्लाई नहीं कर सकते हैं .

6 . testing is context dependent

ये principle हमको बताता हैं . अगर हमmedical software की testing  में जिन text module cases use कर रहे हैं . उन text cases module को gaming software पर apply नही कर सकते हैं . medical software  में जो कैलकुलेशन वह बहुत सटीक और बहुत ही reliable होनी चहिये . इसमें एक छोटी सी भी गलती बहुत बड़ा नुकसान कर सकती हैं . gaming software में हम उसकी जो भी hardware के ऊपर चल रही होती हैं .उसको कितनी ram चाहिये ,computer hang तो नहीं होगा . तो ये सब देखते है gaming software की testing  में .

7. absence of error fallacy

absence of error fallacy का मतलब हमने किसी software की testing तो की लेकिन हमको error नही मिले तो इसका मतलब software काफी अच्छा हैं. या हमारी testing अच्छे से नहीं हुई. अगर हमारे text cases से error नहीं मिल रही . तो हमारे text cases को software के हिसाब से design नहीं किया गया . जिससे ज्यादा से ज्यादा error निकल सके . इसके लिये हम फिर से text cases  को upgrade करेंगे . फिर से software requirement check करेंगे उसके कुछ factors देखेंगे . फिर उसी तरह से software के text cases तैयार करेंगे .

अगर software में issues नहीं हैं तो इसका मतलब ये नहीं software तैयार हैं नहीं हमको फिर से अपने text cases को upgrade करके फिर से testing करनी होगी. click

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Terms plan in hindi

  • Item to be tested :- इसमें हम ये decide करते हैं की हमको कोन से item को test करना हैं.
  • Levels of tested:- इसमें हमको decide करना हैं की हमको testing किस level पर करनी हैं.
  • Sequence of testing:- इसमें हमको ये देखना हैं कैसे sequence maintain करना हैं.
  • Test strategy to be applied to test each item:-  इसमें हमको ये देखना होता हैं की हमको कोन -सी test strategy apply करनी हैं.
  • Describe to the environment:- इसमें हमको ये देखना हैं software किस environment में test करना हैं.
Test plan document
  1. The scope
  2. Approach
  3. Resources
  4. Schedule
  5. Features to be tested
  6. task planning
  7. Task environment

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Test Case in hindi

test case बहुत ही जरुरी terminology होती हैं . हमारे testing field में.  test case में हम basically से सब note करते हैं. हमें  क्या input देना है system को उससे हमें क्या output मिलता हैं.उसकी precondition क्या है, उसके expect result क्या होंगे ये सारी information हम document में लिखते हैं  और document को text case कहते हैं.

test case एक starting point होता हैं. जहाँ ये text execution start होता हैं और कुछ input value add करने के बाद हमे पता चलजाता हैं.  की हम जो output expect कर रहे हैं वो सही में आ रहा हैं की नहीं.

Test case parameter

ये बो चीज हैं जो एक test case में हम use करते हैं. हर test case में ये use करना जरुरी नहीं होता हैं. जो basic information हैं वही use करते हैं.

  • Typical test case parameters
  • Test case ID
  • Test scenario
  • Test case Description
  • Test Steps
  • Prerequisite
  • Test Data
  • Expected result
  • Test Parameter
  • Actual Result
  • Environment information
  • Comments

Test Data

test data वो data हैं जो use होता हैं test execute के लिये.

test data precise and exhaustive होना चाहिए जिससे defects uncover हो जाते हैं सारे.

Test Ware

 test ware एक टर्म हैं जो use होता हैं वो सारे चीज ले लिये जो test के लिये use होती हैं.

Test Script 

test script एक set of instruction हैं जो flow करते हैं जो हम testing perform करेंगे  system पर test script को commonly test case ही कहते हैं.

Test Log 

test log में हम देखते हैं कौन से test case पास हुये है. कौन से fail हुये है.  उनको हम एक जगह पर record करके रखते है ताकि हम उनको easily देख सकते हर test case  के बाद हर log को update करते हैं.

Test level

  • Unit Test :- सबसे पहले हम unit test करेंगे. छोटे-छोटे test को हम unit test कहते हैं.इसमें हम component को test करेंगे.
  • Incretion :- जिसमें हम group of component को test करेंगे.
  • System test :- यहाँ पर हम system को apply करेंगे यहाँ हम ये देख ते हैं जो particular जो application हैं क्या वह system के साथ चल पायेगी.

Acceptance test

अगर पूरा system अच्छे से  चल रहा है तो उसे कहते हैं acceptance.

Test Summary

अगर हमने कोई test case perform किया हैं और उसके बाद हमको जो भी result मिले हम test summary के form में बनाते हैं. जिसे हम test summary कहते हैं. इसके अंदर सारा record होता हैं . जैसे हमने क्या input किये थे उसका क्या output आया था, क्या हमको actual result मिले the और क्या expected result था .

अगर आप requirement के base पर testing करते हैं  तो test report में कितना coverage हुआ requirement अनुसार वो maintenance करते हैं.

More software testing terms in hindi

what is  bug in hindi 

कोई programming error के कारण अगर कोई functionality हमको expected output नहीं दे रही हैं use bug कहते हैं.

अगर कोई website calculation हो रही हैं और उसका calculation 2*2 = 10 दे रहा हैं तो इसका मतलब coding के logic में developer ने गलती की हैं. इसलिए output जो हैं वो expected नही मिल रहा हैं. इसे हम bug बोलते हैं.

what is  Error

expected output और actual output के difference को हम error कहते हैं.

इन्सान  से होने वाली गलती को error होती हैं.

example : cab application का

cab में जो billing होता हैं. billing के time पर आपने देखा होगा उसके अंदर wait charge होते हैं. कितना wait करने पर कितना charge लगेगा.  इसमें functionality तो work कर रही हैं. लेकिन जिस तरीके से functionality को work करना था उस तरीके से नहीं कर रही हैं. ये एक Error हैं.

failure

software अपनी क्षमता के अनुसार function न करे तो उसे failure कहते हैं.

example:- AC का काम Cooling करना हैं. लेकिन cooling न करे सिर्फ हवा दे रहा हैं तो ये failure हैं.

Defect

अगर हमको costumer के अनुसार output न मिले तो use Defect कहते हैं. और जाने  के लिए click करें.

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